Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.53.16: युधिष्ठिर हमें (युद्ध की चर्चा के कारण) संकट में देखकर हमारी उपेक्षा नहीं कर सकते। वे मुझ पर अन्यायपूर्वक संघर्ष बढ़ाने का आरोप लगाते हैं (फिर वे मेरी संधि की बात क्यों नहीं मानेंगे?)॥16॥ | mahabharat अध्याय 5.53: कौरवसभामें धृतराष्ट्रका युद्धसे भय दिखाकर शान्तिके लिये प्रस्ताव करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न तु न: क्लिश्यमानानामुपेक्षेत युधिष्ठिर:।
जुगुप्सति ह्यधर्मेण मामेवोद्दिश्य कारणम्॥ १६॥
अनुवाद
युधिष्ठिर हमें (युद्ध की चर्चा के कारण) संकट में देखकर हमारी उपेक्षा नहीं कर सकते। वे मुझ पर अन्यायपूर्वक संघर्ष बढ़ाने का आरोप लगाते हैं (फिर वे मेरी संधि की बात क्यों नहीं मानेंगे?)॥16॥
Yudhishthira cannot ignore us when he sees us in distress (due to the talk of war). He blames me for unjustly increasing the conflict (then why will he not agree to my proposal for peace?)॥ 16॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि यानसंधिपर्वणि धृतराष्ट्रवाक्ये त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत यानसंधिपर्वमें धृतराष्ट्रवाक्यविषयक तिरपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥