Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.53.14-15: कौरवों! मैं तो यही समझता हूँ कि पांडवों के साथ युद्ध न हो, यही अच्छा है। तुम सब लोग यह बात अच्छी तरह समझ लो। यदि युद्ध हुआ तो समस्त कुरुवंश का विनाश अवश्यंभावी है। मेरे मन का यही उत्तम निर्णय है। इससे मेरे मन को शांति मिलती है। यदि तुम लोग भी यही चाहते हो कि युद्ध न हो, तो हमें शांति का प्रयत्न करना चाहिए। ॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 5.53: कौरवसभामें धृतराष्ट्रका युद्धसे भय दिखाकर शान्तिके लिये प्रस्ताव करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तैरयुद्धं साधु मन्ये कुरवस्तन्निबोधत।
युद्धे विनाश: कृत्स्नस्य कुलस्य भविता ध्रुवम्॥ १४॥
एषा मे परमा बुद्धिर्यया शाम्यति मे मन:।
यदि त्वयुद्धमिष्टं वो वयं शान्त्यै यतामहे॥ १५॥
अनुवाद
कौरवों! मैं तो यही समझता हूँ कि पांडवों के साथ युद्ध न हो, यही अच्छा है। तुम सब लोग यह बात अच्छी तरह समझ लो। यदि युद्ध हुआ तो समस्त कुरुवंश का विनाश अवश्यंभावी है। मेरे मन का यही उत्तम निर्णय है। इससे मेरे मन को शांति मिलती है। यदि तुम लोग भी यही चाहते हो कि युद्ध न हो, तो हमें शांति का प्रयत्न करना चाहिए। ॥14-15॥
Kauravas! I think it is better that there is no war with the Pandavas. You all should understand this well. If there is a war then the destruction of the entire Kuru clan is inevitable. This is the best decision of my mind. This gives peace to my mind. If you also want that there is no war then we should try for peace. ॥ 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥