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mahabharat 5.53.1: धृतराष्ट्र बोले - संजय! जिस प्रकार सभी पाण्डव वीर और विजय के इच्छुक हैं, उसी प्रकार उनके सहायक भी विजय के लिए दृढ़संकल्पित हैं और उनके लिए प्राणों की आहुति देने को तत्पर हैं॥1॥   |   mahabharat अध्याय 5.53: कौरवसभामें धृतराष्ट्रका युद्धसे भय दिखाकर शान्तिके लिये प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 53: कौरवसभामें धृतराष्ट्रका युद्धसे भय दिखाकर शान्तिके लिये प्रस्ताव करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.53.1 
धृतराष्ट्र उवाच
यथैव पाण्डवा: सर्वे पराक्रान्ता जिगीषव:।
तथैवाभिसरास्तेषां त्यक्तात्मानो जये धृता:॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - संजय! जिस प्रकार सभी पाण्डव वीर और विजय के इच्छुक हैं, उसी प्रकार उनके सहायक भी विजय के लिए दृढ़संकल्पित हैं और उनके लिए प्राणों की आहुति देने को तत्पर हैं॥1॥
 
Dhritarashtra said - Sanjaya! Just as all the Pandavas are valiant and desirous of victory, in the same way their helpers are also determined to win and are ready to sacrifice their lives for them.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)