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श्लोक  5.52.2 
तस्यैव च न पश्यामि युधि गाण्डीवधन्वन:।
अनिशं चिन्तयानोऽपि य: प्रतीयाद् रथेन तम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
निरंतर विचार करने पर भी मुझे ऐसा कोई योद्धा नहीं दिखाई देता जो युद्ध में गांडीवधारी तथा रथ पर सवार अर्जुन का सामना कर सके।
 
Even after continuous thinking, I do not see any warrior who can face Gandiva-wielding Arjun in the war and who is riding on a chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)