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mahabharat 5.52.16-17h: क्या गाण्डीव धनुष से निकला हुआ बाण-रूपी तेज सम्पूर्ण दिशाओं में प्रज्वलित होकर युद्ध में मेरे पुत्रों की (विशाल) सेना को जलाकर भस्म कर देगा?॥16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.52: धृतराष्ट्रद्वारा अर्जुनसे प्राप्त होनेवाले भयका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 52: धृतराष्ट्रद्वारा अर्जुनसे प्राप्त होनेवाले भयका वर्णन  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  5.52.16-17h 
अपि बाणमयं तेज: प्रदीप्तमिव सर्वत:॥ १६॥
गाण्डीवोत्थं दहेताजौ पुत्राणां मम वाहिनीम्।
 
 
अनुवाद
क्या गाण्डीव धनुष से निकला हुआ बाण-रूपी तेज सम्पूर्ण दिशाओं में प्रज्वलित होकर युद्ध में मेरे पुत्रों की (विशाल) सेना को जलाकर भस्म कर देगा?॥16 1/2॥
 
Will the arrow-like power issued from the Gandiva bow, blazing in all directions, burn to ashes the (huge) army of my sons in the battle?॥16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)