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mahabharat 5.52.15-16h: मेरे लिए वीर धनंजय युद्ध में बाण चलाते, योद्धाओं के प्राण लेते तथा अपने बाणों की वर्षा से उनके सिर धड़ से अलग करते दिखाई देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.52: धृतराष्ट्रद्वारा अर्जुनसे प्राप्त होनेवाले भयका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 52: धृतराष्ट्रद्वारा अर्जुनसे प्राप्त होनेवाले भयका वर्णन  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  5.52.15-16h 
अपि चास्यन्निवाभाति निघ्नन्निव धनंजय:॥ १५॥
उद्धरन्निव कायेभ्य: शिरांसि शरवृष्टिभि:।
 
 
अनुवाद
मेरे लिए वीर धनंजय युद्ध में बाण चलाते, योद्धाओं के प्राण लेते तथा अपने बाणों की वर्षा से उनके सिर धड़ से अलग करते दिखाई देते हैं।
 
To me, the heroic Dhananjaya can be seen shooting arrows in the war, taking the lives of warriors and cutting off their heads from their bodies with his shower of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)