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mahabharat 5.52.14-15h: हे संजय! प्रज्वलित वज्र किसी के सिर पर लगकर उसके प्राण बचा सकता है, किन्तु किरीटधारी अर्जुन के छोड़े हुए बाण उसे जीवित नहीं छोड़ते, जो उनसे आक्रांत हो जाता है। ॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.52: धृतराष्ट्रद्वारा अर्जुनसे प्राप्त होनेवाले भयका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 52: धृतराष्ट्रद्वारा अर्जुनसे प्राप्त होनेवाले भयका वर्णन  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  5.52.14-15h 
शेषयेदशनिर्दीप्तो विपतन् मूर्ध्नि संजय॥ १४॥
न तु शेषं शरास्तात कुर्युरस्ता: किरीटिना।
 
 
अनुवाद
हे संजय! प्रज्वलित वज्र किसी के सिर पर लगकर उसके प्राण बचा सकता है, किन्तु किरीटधारी अर्जुन के छोड़े हुए बाण उसे जीवित नहीं छोड़ते, जो उनसे आक्रांत हो जाता है। ॥14 1/2॥
 
O dear Sanjaya! The thunderbolt burning with its brilliance may strike someone's head and save his life, but the arrows shot by the crown-wearing Arjuna will not leave alive the one who gets hit by them. ॥14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)