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श्लोक  5.51.59 
किंनु कुर्यां कथं कुर्यां क्व नु गच्छामि संजय।
एते नश्यन्ति कुरवो मन्दा: कालवशं गता:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
संजय! मुझे क्या करना चाहिए, कैसे करना चाहिए और कहाँ जाना चाहिए? ये मूर्ख कौरव काल के प्रभाव में आकर नष्ट होना चाहते हैं।
 
Sanjaya! What should I do, how should I do it and where should I go? These foolish Kauravas want to perish under the influence of time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)