Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.51.58: मैं समझता हूँ कि यह अत्यंत तीव्र गति से चलने वाले काल का क्रमिक नियम है। मैं इस कालचक्र में इसकी परिधि के समान आसक्त हूँ, अतः इससे भागना मेरे लिए संभव नहीं है ॥58॥ | mahabharat अध्याय 5.51: भीमसेनके पराक्रमसे डरे हुए धृतराष्ट्रका विलाप । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं समझता हूँ कि यह अत्यंत तीव्र गति से चलने वाले काल का क्रमिक नियम है। मैं इस कालचक्र में इसकी परिधि के समान आसक्त हूँ, अतः इससे भागना मेरे लिए संभव नहीं है ॥58॥
I understand that this is the gradual law of the extremely fast moving time. I am attached to this cycle of time like its rim, hence it is not possible for me to run away from it. ॥ 58॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥