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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके पराक्रमसे डरे हुए धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.51.3 
जागर्मि रात्रय: सर्वा दीर्घमुष्णं च नि:श्वसन्।
भीतो वृकोदरात् तात सिंहात् पशुरिवापर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
बेटा! सिंह से डरने वाले अन्य जानवरों की तरह मैं भीमसेन के डर से सारी रात जागता रहता हूँ, लंबी-लंबी साँसें लेता रहता हूँ।
 
Son! Like any other animal scared of a lion, I remain awake the entire night, taking long and hot breaths, fearing Bhimasena.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)