Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.51.29-31: जब भीमसेन क्रोध के आँसू बहाते हुए और बार-बार होंठ चाटते हुए अपनी गदा घुमाते हुए हाथियों के सिरों को छेदने लगेंगे, सामने गर्जते हुए हाथियों को लक्ष्य करके उनकी ओर दौड़ेंगे, विपरीत दिशा में दौड़ते हुए मदोन्मत्त हाथियों की गर्जना के प्रत्युत्तर में गर्जना करेंगे, और मेरे महारथियों की सेना में घुसकर एक-एक करके श्रेष्ठ योद्धाओं को मारने लगेंगे, तब अग्नि के समान प्रज्वलित भीमसेन के हाथों से मेरे पुत्र कैसे बचेंगे?॥ 29-31॥ | mahabharat अध्याय 5.51: भीमसेनके पराक्रमसे डरे हुए धृतराष्ट्रका विलाप । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब भीमसेन क्रोध के आँसू बहाते हुए और बार-बार होंठ चाटते हुए अपनी गदा घुमाते हुए हाथियों के सिरों को छेदने लगेंगे, सामने गर्जते हुए हाथियों को लक्ष्य करके उनकी ओर दौड़ेंगे, विपरीत दिशा में दौड़ते हुए मदोन्मत्त हाथियों की गर्जना के प्रत्युत्तर में गर्जना करेंगे, और मेरे महारथियों की सेना में घुसकर एक-एक करके श्रेष्ठ योद्धाओं को मारने लगेंगे, तब अग्नि के समान प्रज्वलित भीमसेन के हाथों से मेरे पुत्र कैसे बचेंगे?॥ 29-31॥
When Bhimasena, shedding tears of anger and licking his lips again and again, will start swinging his mace and piercing the heads of the elephants, will target the roaring elephants in front of him and run towards them, will roar in response to the roars of the intoxicated elephants running in the opposite direction, and will enter the army of my charioteers and start killing the best warriors one by one, then how will my sons survive from the hands of Bhima, who is blazing like fire?॥ 29-31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥