Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.51.28: हे संजय! भीमसेन की गदा चार हाथ लम्बी है और उसमें घुटनों पर धारण करने योग्य छः कोण हैं। उस अत्यन्त चमकीली गदा का स्पर्श भी पीड़ादायक है। जब भीमसेन मेरे पुत्रों पर इसका प्रयोग करेंगे, तो वे उसका प्रहार कैसे सहन कर सकेंगे?॥28॥ | mahabharat अध्याय 5.51: भीमसेनके पराक्रमसे डरे हुए धृतराष्ट्रका विलाप । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शैक्यां तात चतुष्किष्कुं षडस्रिममितौजसम्।
प्रहितां दु:खसंस्पर्शां कथं शक्ष्यन्ति मे सुता:॥ २८॥
अनुवाद
हे संजय! भीमसेन की गदा चार हाथ लम्बी है और उसमें घुटनों पर धारण करने योग्य छः कोण हैं। उस अत्यन्त चमकीली गदा का स्पर्श भी पीड़ादायक है। जब भीमसेन मेरे पुत्रों पर इसका प्रयोग करेंगे, तो वे उसका प्रहार कैसे सहन कर सकेंगे?॥28॥
O dear Sanjaya! Bhimasena's mace is four hands long and is adorned with six angles, which are suitable to be held on the knees. Even the touch of that extremely bright mace is painful. When Bhima will use it on my sons, how will they be able to bear its blow?॥28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥