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mahabharat 5.51.27: जैसे महान मृग सिंह से युद्ध करता है, वैसे ही जो मनुष्य रूप धारण करके यमराज से युद्ध करने के लिए युद्धभूमि में जाते हैं, उन्हें यह मानना ​​चाहिए कि स्वयं विधाता ने उन्हें मरने के लिए प्रेरित करके यहाँ भेजा है॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 5.51: भीमसेनके पराक्रमसे डरे हुए धृतराष्ट्रका विलाप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके पराक्रमसे डरे हुए धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.51.27 
संयुगं ये गमिष्यन्ति नररूपेण मृत्युना।
नियतं चोदिता धात्रा सिंहेनेव महामृगा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जैसे महान मृग सिंह से युद्ध करता है, वैसे ही जो मनुष्य रूप धारण करके यमराज से युद्ध करने के लिए युद्धभूमि में जाते हैं, उन्हें यह मानना ​​चाहिए कि स्वयं विधाता ने उन्हें मरने के लिए प्रेरित करके यहाँ भेजा है॥ 27॥
 
Just as a great deer fights a lion, similarly, those who go to the battlefield to fight with Yamaraja in human form, should believe that the Creator himself has sent them here, impelled to die.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)