Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.51.26: मैं चीखता-चिल्लाता रहता हूँ, परन्तु ये मूर्ख पुत्र जो अपने को विद्वान समझते हैं, मेरी एक न सुनते। वे वृक्ष की ऊँची शाखा पर लगे हुए मधु को ही देखते हैं, वहाँ से गिरने के भयंकर खतरे की ओर उनका ध्यान नहीं जाता॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 5.51: भीमसेनके पराक्रमसे डरे हुए धृतराष्ट्रका विलाप । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्रोशतो मे न शृण्वन्ति बाला: पण्डितमानिन:।
विषमं न हि मन्यन्ते प्रपातं मधुदर्शिन:॥ २६॥
अनुवाद
मैं चीखता-चिल्लाता रहता हूँ, परन्तु ये मूर्ख पुत्र जो अपने को विद्वान समझते हैं, मेरी एक न सुनते। वे वृक्ष की ऊँची शाखा पर लगे हुए मधु को ही देखते हैं, वहाँ से गिरने के भयंकर खतरे की ओर उनका ध्यान नहीं जाता॥ 26॥
I keep screaming and shouting, but these foolish sons who think themselves learned do not listen to me. They only look at the honey stuck on the high branch of the tree, they do not pay attention to the terrible danger of falling from there.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥