Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.51.17-18h: संजय! पाण्डुपुत्र भीमसेन बचपन में भी मेरे वश में नहीं थे; फिर जब मेरे दुष्ट पुत्रों ने उन्हें बार-बार कष्ट दिया है, तो अब वे मेरे वश में कैसे हो सकते हैं?॥ 17 1/2॥ | mahabharat अध्याय 5.51: भीमसेनके पराक्रमसे डरे हुए धृतराष्ट्रका विलाप । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न स जातु वशे तस्थौ मम बाल्येऽपि संजय॥ १७॥
किं पुनर्मम दुष्पुत्रै: क्लिष्ट: सम्प्रति पाण्डव:।
अनुवाद
संजय! पाण्डुपुत्र भीमसेन बचपन में भी मेरे वश में नहीं थे; फिर जब मेरे दुष्ट पुत्रों ने उन्हें बार-बार कष्ट दिया है, तो अब वे मेरे वश में कैसे हो सकते हैं?॥ 17 1/2॥
Sanjaya! Even in his childhood, Bhimasena, the son of Pandu, was never under my control; then, when my wicked sons have repeatedly troubled him, how can he be under my control now?॥ 17 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥