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mahabharat 5.51.11: उसकी याद आते ही मेरा दिल काँप उठता है। बचपन में भी, जब दुर्योधन जैसे मेरे बेटे उसके साथ खेलते थे, तो वह हाथियों के राजा की तरह उन सबको कुचल देता था।   |   mahabharat अध्याय 5.51: भीमसेनके पराक्रमसे डरे हुए धृतराष्ट्रका विलाप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 51: भीमसेनके पराक्रमसे डरे हुए धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.51.11 
उद्वेपते मे हृदयं ये मे दुर्योधनादय:।
बाल्येऽपि तेन युध्यन्तो वारणेनेव मर्दिता:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उसकी याद आते ही मेरा दिल काँप उठता है। बचपन में भी, जब दुर्योधन जैसे मेरे बेटे उसके साथ खेलते थे, तो वह हाथियों के राजा की तरह उन सबको कुचल देता था।
 
My heart starts trembling when I think of him. Even in childhood, when my sons like Duryodhan used to play games with him, he used to crush them all like a king of elephants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)