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mahabharat 5.50.3: युधिष्ठिर धर्म के ज्ञाता हैं और धर्म का पालन करने में सदैव तत्पर रहते हैं। मेरे मंदबुद्धि पुत्रों ने अपने छल-कपट से उन्हें क्रोधित कर दिया है। वे कौन लोग हैं जो उन्हें बार-बार शांत रहने की सलाह देते हैं और युद्ध करने से रोकते हैं?॥3॥   |   mahabharat अध्याय 5.50: संजयद्वारा युधिष्ठिरके प्रधान सहायकोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 50: संजयद्वारा युधिष्ठिरके प्रधान सहायकोंका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.50.3 
के स्विदेनं वारयन्ति युद्धाच्छाम्येति वा पुन:।
निकृत्या कोपितं मन्दैर्धर्मज्ञं धर्मचारिणम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर धर्म के ज्ञाता हैं और धर्म का पालन करने में सदैव तत्पर रहते हैं। मेरे मंदबुद्धि पुत्रों ने अपने छल-कपट से उन्हें क्रोधित कर दिया है। वे कौन लोग हैं जो उन्हें बार-बार शांत रहने की सलाह देते हैं और युद्ध करने से रोकते हैं?॥3॥
 
Yudhishthira is a knower of Dharma and is always ready to follow Dharma. My dull-witted sons have angered him with their deceitful behavior. Who are those people who repeatedly advise him to remain calm and stop him from fighting?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)