Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.50.20-23: जिनके बल और पराक्रम के कारण चारों पाण्डव अचानक लाक्षागृह से निकलकर इस पृथ्वी पर जीवित बचे, जिन्होंने नरभक्षी राक्षसी हिडिम्ब से अपने भाइयों की रक्षा की, जो उस संकट के समय पाण्डवों के लिए द्वीप के समान आश्रय बन गये, जिन्होंने सिन्धुराज जयद्रथ द्वारा द्रौपदी का हरण किये जाने पर भी पाण्डवों को द्वीप के समान आश्रय दिया तथा जिन्होंने वारणावत नगर में एकत्रित समस्त पाण्डवों को लाक्षागृह की अग्नि में जलने से बचाया, उन्हीं भीमसेन के बल से पाण्डवों ने आप सबके साथ युद्ध के लिए तैयारी की है। | mahabharat अध्याय 5.50: संजयद्वारा युधिष्ठिरके प्रधान सहायकोंका वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिनके बल और पराक्रम के कारण चारों पाण्डव अचानक लाक्षागृह से निकलकर इस पृथ्वी पर जीवित बचे, जिन्होंने नरभक्षी राक्षसी हिडिम्ब से अपने भाइयों की रक्षा की, जो उस संकट के समय पाण्डवों के लिए द्वीप के समान आश्रय बन गये, जिन्होंने सिन्धुराज जयद्रथ द्वारा द्रौपदी का हरण किये जाने पर भी पाण्डवों को द्वीप के समान आश्रय दिया तथा जिन्होंने वारणावत नगर में एकत्रित समस्त पाण्डवों को लाक्षागृह की अग्नि में जलने से बचाया, उन्हीं भीमसेन के बल से पाण्डवों ने आप सबके साथ युद्ध के लिए तैयारी की है।
Due to whose strength and valour, the four Pandavas suddenly came out of the Lakhsha Bhavan and survived on this earth, who protected his brothers from the man-eating demon Hidimba, who became a shelter for the Pandavas like an island in that time of crisis, who gave shelter to the Pandavas like an island even when Sindhuraj Jayadratha abducted Draupadi, and who saved all the Pandavas gathered in the city of Varanavat from being burnt in the fire of Lakhshagriha, with the strength of that same Bhimasena, the Pandavas have prepared for war with you all.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥