Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.50.17-18: महाराज! पाण्डवों ने युद्ध के लिए तैयारी की है, क्योंकि अजातशत्रु धर्मात्मा है, जो न क्रोध से, न भय से, न लोभ से, न धन के लिए, न किसी बहाने से भी सत्य का परित्याग कर सकता है, जो धर्मात्माओं में श्रेष्ठ है और धर्म का अधिकारी माना जाता है। | mahabharat अध्याय 5.50: संजयद्वारा युधिष्ठिरके प्रधान सहायकोंका वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो नैव रोषान्न भयान्न लोभान्नार्थकारणात्।
न हेतुवादाद् धर्मात्मा सत्यं जह्यात् कदाचन॥ १७॥
य: प्रमाणं महाराज धर्मे धर्मभृतां वर:।
अजातशत्रुणा तेन पाण्डवा अभ्ययुञ्जत॥ १८॥
अनुवाद
महाराज! पाण्डवों ने युद्ध के लिए तैयारी की है, क्योंकि अजातशत्रु धर्मात्मा है, जो न क्रोध से, न भय से, न लोभ से, न धन के लिए, न किसी बहाने से भी सत्य का परित्याग कर सकता है, जो धर्मात्माओं में श्रेष्ठ है और धर्म का अधिकारी माना जाता है।
Maharaj! The Pandavas have prepared for war due to the influence of Ajatashatru, who is a righteous soul who can never abandon the truth either out of anger, nor out of fear, nor out of greed, nor for the sake of money, nor even by making an excuse, who is the best among the righteous souls and is considered to be the authority on religion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥