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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन
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श्लोक 6
श्लोक
5.49.6
बृहस्पतिस्तु पप्रच्छ ब्रह्माणं काविमाविति।
भवन्तं नोपतिष्ठेते तौ न: शंस पितामह॥ ६॥
अनुवाद
यह देखकर बृहस्पतिजी ने ब्रह्माजी से पूछा - 'पितामह! ये दोनों कौन हैं, जिन्होंने आपको नमस्कार भी नहीं किया? कृपया उनका परिचय हमें दीजिए।'॥6॥
Seeing this Brihaspatiji asked Brahmaji - 'Grandfather! Who are these two who did not even greet you? Please introduce them to us.'॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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