श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  5.49.48 
तदैव कुरव: सर्वे निराशा जीवितेऽभवन्।
भीष्मद्रोणौ यदा राजा न सम्यगनुभाषते॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
जब राजा धृतराष्ट्र ने भीष्म और द्रोणाचार्य से भी ठीक प्रकार से बातचीत नहीं की, तब समस्त कौरव अपने जीवन से निराश हो गए ॥48॥
 
When King Dhritarashtra did not converse properly even with Bhishma and Dronacharya, all the Kauravas despaired of their lives. ॥ 48॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि यानसंधिपर्वणि भीष्मद्रोणवाक्ये एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत यानसंधिपर्वमें भीष्मद्रोणवचनविषयक उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)