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mahabharat 5.49.46: ‘तीनों लोकों में अर्जुन के समान कोई धनुर्धर नहीं है । 46॥   |   mahabharat अध्याय 5.49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.49.46 
न ह्यस्य त्रिषु लोकेषु सदृशोऽस्ति धनुर्धर:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
‘तीनों लोकों में अर्जुन के समान कोई धनुर्धर नहीं है । 46॥
 
‘There is no archer like Arjun in the three worlds. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)