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mahabharat 5.49.43: भीष्म के ये वचन सुनकर महाबली द्रोणाचार्य ने समस्त राजाओं के समक्ष उनकी प्रशंसा करते हुए राजा धृतराष्ट्र से इस प्रकार कहा-॥43॥   |   mahabharat अध्याय 5.49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.49.43 
भीष्मस्य तु वच: श्रुत्वा भारद्वाजो महामना:।
धृतराष्ट्रमुवाचेदं राजमध्येऽभिपूजयन्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म के ये वचन सुनकर महाबली द्रोणाचार्य ने समस्त राजाओं के समक्ष उनकी प्रशंसा करते हुए राजा धृतराष्ट्र से इस प्रकार कहा-॥43॥
 
On hearing these words of Bhishma, the great Dronacharya, praising him in front of all kings, said this to King Dhritarashtra -॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)