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mahabharat 5.49.37: जैसा करतब समस्त पाण्डवों ने एक साथ अथवा प्रत्येक ने अलग-अलग किया है, वैसा कठिन करतब क्या इस सारथीपुत्र ने पहले कभी किया है?॥ 37॥   |   mahabharat अध्याय 5.49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.49.37 
किं चाप्येतेन तत्कर्म कृतपूर्वं सुदुष्करम्।
तैर्यथा पाण्डवै: सर्वैरेकैकेन कृतं पुरा॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जैसा करतब समस्त पाण्डवों ने एक साथ अथवा प्रत्येक ने अलग-अलग किया है, वैसा कठिन करतब क्या इस सारथीपुत्र ने पहले कभी किया है?॥ 37॥
 
Like the feats performed by all the Pandavas together or by each one of them individually, has this son of a charioteer ever performed such difficult feats before?॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)