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mahabharat 5.49.34: हे राजन! कर्ण का यह प्रतिदिन का दावा कि वह पांडवों का वध कर देगा, व्यर्थ है। मेरे विचार से यह महात्मा पांडवों का सोलहवाँ अंश भी नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 5.49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.49.34 
यदयं कत्थते नित्यं हन्ताहं पाण्डवानिति।
नायं कलापि सम्पूर्णा पाण्डवानां महात्मनाम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! कर्ण का यह प्रतिदिन का दावा कि वह पांडवों का वध कर देगा, व्यर्थ है। मेरे विचार से यह महात्मा पांडवों का सोलहवाँ अंश भी नहीं है।
 
O King! Karna's daily boasting that he will kill the Pandavas is futile. In my opinion, this great soul is not even one-sixteenth of the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)