Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.49.32: जिस प्रकार मुझे राजा धृतराष्ट्र को प्रसन्न करने वाले सभी कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, उसी प्रकार दुर्योधन के लिए भी वही कर्तव्य करना उचित है, क्योंकि अब वह राज्य का शासक है। | mahabharat अध्याय 5.49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राज्ञो हि धृतराष्ट्रस्य सर्वं कार्यं प्रियं मया।
तथा दुर्योधनस्यापि स हि राज्ये समाहित:॥ ३२॥
अनुवाद
जिस प्रकार मुझे राजा धृतराष्ट्र को प्रसन्न करने वाले सभी कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, उसी प्रकार दुर्योधन के लिए भी वही कर्तव्य करना उचित है, क्योंकि अब वह राज्य का शासक है।
Just as I should perform all the duties that please King Dhritarashtra, similarly it is appropriate to perform the same duties for Duryodhan too because now he is the ruler of the kingdom.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥