श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  5.49.31-32h 
अहं हि पाण्डवान् सर्वान् हनिष्यामि रणे स्थितान्॥ ३१॥
प्राग्विरुद्धै: शमं सद्भि: कथं वा क्रियते पुन:।
 
 
अनुवाद
मैं युद्धभूमि में खड़ा होकर निश्चय ही समस्त पाण्डवों का वध कर दूँगा। जो पहले तुम्हारे शत्रु थे, उनके साथ फिर संधि कैसे हो सकती है?॥31 1/2॥
 
I will surely kill all the Pandavas when I stand on the battlefield. How can a treaty be made again with those who were your enemies earlier?॥ 31 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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