| श्री महाभारत » पर्व 5: उद्योग पर्व » अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन » श्लोक 23-24 |
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| | | | श्लोक 5.49.23-24  | शङ्खचक्रगदाहस्तं यदा द्रक्ष्यसि केशवम्।
पर्याददानं चास्त्राणि भीमधन्वानमर्जुनम्॥ २३॥
सनातनौ महात्मानौ कृष्णावेकरथे स्थितौ।
दुर्योधन तदा तात स्मर्तासि वचनं मम॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | हे मेरे पुत्र दुर्योधन! जब तू देखेगा कि सनातन आत्मा श्री कृष्ण और अर्जुन दोनों एक ही रथ पर बैठे हुए हैं, श्री कृष्ण के हाथों में शंख, चक्र और गदा है तथा भयंकर धनुष धारण किए हुए अर्जुन निरंतर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र चला और छोड़ रहे हैं, तब तुझे मेरे वचन याद आएँगे॥ 23-24॥ | | | | My son Duryodhana, when you will see that both the eternal souls Shri Krishna and Arjuna are seated on the same chariot, Shri Krishna has a conch, discus and mace in his hands and Arjuna, who is holding a fierce bow, is continuously taking and releasing various types of weapons, then you will remember my words.॥ 23-24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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