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mahabharat 5.49.21: वे दोनों अपने पुण्य के प्रभाव से अक्षय और ध्रुवलोक में निवास करते हैं। जब और जहाँ भी लोक-कल्याण के लिए युद्ध का अवसर आता है, वहाँ वे बार-बार अवतार लेते हैं।॥21॥   |   mahabharat अध्याय 5.49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.49.21 
एतौ हि कर्मणा लोकानश्नुवातेऽक्षयान् ध्रुवान्।
तत्र तत्रैव जायेते युद्धकाले पुन: पुन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों अपने पुण्य के प्रभाव से अक्षय और ध्रुवलोक में निवास करते हैं। जब और जहाँ भी लोक-कल्याण के लिए युद्ध का अवसर आता है, वहाँ वे बार-बार अवतार लेते हैं।॥21॥
 
Both of them exist by occupying Akshay and Dhruvaloks due to the effect of their good deeds. Whenever and wherever there is an occasion of war for the welfare of the people, they take incarnation there again and again. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)