Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.49.10: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! ब्रह्माजी के ये वचन सुनकर इन्द्र, बृहस्पति आदि देवताओं के साथ उस स्थान पर गए जहाँ उन दोनों ऋषियों ने तपस्या की थी।   |   mahabharat अध्याय 5.49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 49: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुन: उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.49.10 
वैशम्पायन उवाच
जगाम शक्रस्तच्छ्रुत्वा यत्र तौ तेपतुस्तप:।
सार्धं देवगणै: सर्वैर्बृहस्पतिपुरोगमै:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! ब्रह्माजी के ये वचन सुनकर इन्द्र, बृहस्पति आदि देवताओं के साथ उस स्थान पर गए जहाँ उन दोनों ऋषियों ने तपस्या की थी।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these words of Brahma, Indra, along with Brihaspati and other gods, went to the place where those two sages had performed penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)