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mahabharat 5.48.80: दैत्यों का एक भयंकर किला था जो प्राग्ज्योतिषपुर नाम से प्रसिद्ध था, जो शत्रुओं के लिए पूर्णतः अजेय था। वहाँ भूमिपुत्र महाबली नरकासुर रहता था, जिसने देवी अदिति के सुन्दर मोती के कुंडल छीन लिए थे।   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  5.48.80 
प्राग्ज्योतिषं नाम बभूव दुर्गं
पुरं घोरमसुराणामसह्यम्।
महाबलो नरकस्तत्र भौमो
जहारादित्या मणिकुण्डले शुभे॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
दैत्यों का एक भयंकर किला था जो प्राग्ज्योतिषपुर नाम से प्रसिद्ध था, जो शत्रुओं के लिए पूर्णतः अजेय था। वहाँ भूमिपुत्र महाबली नरकासुर रहता था, जिसने देवी अदिति के सुन्दर मोती के कुंडल छीन लिए थे।
 
The demons had a fierce fort famous by the name Pragjyotishpur, which was completely invincible for the enemies. There lived the son of Bhumi, the mighty Narakasura, who had taken away the beautiful pearl earrings of Goddess Aditi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)