श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  5.48.74 
यो रुक्मिणीमेकरथेन भोजा-
नुत्साद्य राज्ञ: समरे प्रसह्य।
उवाह भार्यां यशसा ज्वलन्तीं
यस्यां जज्ञे रौक्मिणेयो महात्मा॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
जिन्होंने भोजवंश के राजाओं को एक ही रथ के द्वारा युद्ध में हराकर, उस परम सुन्दरी रुक्मिणी को, जो (सौम्य उपयोग, सौन्दर्य और) उत्तम यश से प्रकाशित थी, अपनी पत्नी बनाया, जिसके गर्भ से महाबुद्धिमान प्रद्युम्न उत्पन्न हुआ॥ 74॥
 
Who, having defeated the kings of the Bhoj dynasty in battle with the help of a single chariot, took as his wife that most beautiful lady Rukmini, shining with (fair use, beauty and) good fame, from whose womb the great-minded Pradyumna was born.॥ 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)