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mahabharat 5.48.72: जो मनुष्य चट्टानों से भरे विशाल श्वेत कैलाश पर्वत को हथेली से मारकर तोड़ने का प्रयत्न करेगा, उसका हाथ कीलों सहित टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा। वह उस पर्वत का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता॥ 72॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  5.48.72 
गिरिं य इच्छेत् तु तलेन भेत्तुं
शिलोच्चयं श्वेतमतिप्रमाणम्।
तस्यैव पाणि: सनखो विशीर्ये-
न्न चापि किंचित् स गिरेस्तु कुर्यात्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य चट्टानों से भरे विशाल श्वेत कैलाश पर्वत को हथेली से मारकर तोड़ने का प्रयत्न करेगा, उसका हाथ कीलों सहित टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा। वह उस पर्वत का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता॥ 72॥
 
‘The person who tries to break the huge white Kailash mountain full of rocks by hitting it with his palm, his hand along with the nails will be torn into pieces. He cannot do any harm to that mountain.॥ 72॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)