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mahabharat 5.48.71: जो मनुष्य युद्ध के द्वारा परम वीर वसुदेवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण को जीतना चाहता है, वह दोनों भुजाओं से तैरकर अनन्त एवं विशाल जलसागर को पार करना चाहता है ॥71॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  5.48.71 
स बाहुभ्यां सागरमुत्तितीर्षे-
न्महोदधिं सलिलस्याप्रमेयम्।
तेजस्विनं कृष्णमत्यन्तशूरं
युद्धेन यो वासुदेवं जिगीषेत्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य युद्ध के द्वारा परम वीर वसुदेवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण को जीतना चाहता है, वह दोनों भुजाओं से तैरकर अनन्त एवं विशाल जलसागर को पार करना चाहता है ॥71॥
 
The one who wishes to conquer the extremely brave Vasudevanandan Lord Shri Krishna through war, wants to cross the infinite and vast ocean of water by swimming with both arms. 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)