श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  5.48.50 
हिरण्मयं श्वेतहयैश्चतुर्भि-
र्यदा युक्तं स्यन्दनं माधवस्य।
द्रष्टा युद्धे सात्यकेर्धार्तराष्ट्र-
स्तदा तप्स्यत्यकृतात्मा स मन्द:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
जब युद्ध में मधुवंशी सात्यकि के चार श्वेत घोड़ों से जुते हुए सुवर्णमय रथ को पापी और मन्दबुद्धि दुर्योधन देखेगा, तब उसे अवश्य ही दुःख होगा ॥50॥
 
When in the battle the golden chariot harnessed by the four white horses of Madhuvanshi Satyaki will be seen by the sinful and dim-witted Duryodhana, then he will definitely feel pain. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)