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mahabharat 5.48.44: तुम दुर्योधन से यह भी कह दो कि अब तुम्हें इस संसार में रहकर राज्य भोगने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। युद्ध के लिए हमने शिनि के पौत्र रथारूढ़ सात्यकि को अपना सहायक चुना है, जो अत्यंत वीर, बलवान, निर्भय और शस्त्रविद्या में निपुण हैं। 44॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.48.44 
इदं च ब्रूया मा वृणीष्वेति लोके
युद्धेऽद्वितीयं सचिवं रथस्थम्।
शिनेर्नप्तारं प्रवृणीम सात्यकिं
महाबलं वीतभयं कृतास्त्रम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तुम दुर्योधन से यह भी कह दो कि अब तुम्हें इस संसार में रहकर राज्य भोगने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। युद्ध के लिए हमने शिनि के पौत्र रथारूढ़ सात्यकि को अपना सहायक चुना है, जो अत्यंत वीर, बलवान, निर्भय और शस्त्रविद्या में निपुण हैं। 44॥
 
You should also tell Duryodhana that now you should not wish to enjoy the kingdom by living in this world. For the war, we have chosen Ratharudha Satyaki, the grandson of Shini, who is extremely brave, very strong, fearless and adept in weaponry, as our assistant. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)