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mahabharat 5.48.39: जब कौरवकुल के प्रधान शान्तनुनन्दन महामुनि भीष्म जी युद्ध में शिखण्डी के द्वारा मारे जाएँगे, तब हमारे शत्रु कौरव हमारे प्रचण्ड वेग का सामना कभी नहीं कर सकेंगे। यह मैं तुमसे सत्य कहता हूँ और इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।॥39॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.48.39 
रणे हते कौरवाणां प्रवीरे
शिखण्डिना सत्तमे शान्तनूजे।
न जातु न: शत्रवो धारयेयु-
रसंशयं सत्यमेतद् ब्रवीमि॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जब कौरवकुल के प्रधान शान्तनुनन्दन महामुनि भीष्म जी युद्ध में शिखण्डी के द्वारा मारे जाएँगे, तब हमारे शत्रु कौरव हमारे प्रचण्ड वेग का सामना कभी नहीं कर सकेंगे। यह मैं तुमसे सत्य कहता हूँ और इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।॥39॥
 
When the chief of the Kaurava clan, Shantanu Nandan, the great sage Bhishma Ji, will be killed by Shikhandi in the war, then our enemies Kauravas will never be able to withstand our ferocity. I am telling you this truth and there is no doubt about it at all. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)