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mahabharat 5.48.17: जब भीमसेन कवच धारण करके शत्रु योद्धाओं का नाश करते हुए अपनी सेना के आगे-आगे बड़े वेग से चलेंगे, और अपने पक्ष वालों को भी ध्यान में न आएगा, और यमराज के समान शत्रु सेना का संहार करने लगेंगे, तब अत्यन्त अभिमानी दुर्योधन को मेरे ये वचन स्मरण आएँगे॥17॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.48.17 
सेनाग्रगं दंशितं भीमसेनं
स्वालक्षणं वीरहणं परेषाम्।
घ्नन्तं चमूमन्तकसंनिकाशं
तदा स्मर्ता वचनस्यातिमानी॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब भीमसेन कवच धारण करके शत्रु योद्धाओं का नाश करते हुए अपनी सेना के आगे-आगे बड़े वेग से चलेंगे, और अपने पक्ष वालों को भी ध्यान में न आएगा, और यमराज के समान शत्रु सेना का संहार करने लगेंगे, तब अत्यन्त अभिमानी दुर्योधन को मेरे ये वचन स्मरण आएँगे॥17॥
 
When Bhimasena, wearing his armor, will destroy the enemy warriors and move ahead of his army at a great speed, unnoticed even by his own side, and will start killing the enemy army like Yamaraja, then the extremely arrogant Duryodhana will remember these words of mine.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)