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mahabharat 5.48.15: जैसे ग्रीष्म ऋतु में प्रज्वलित अग्नि सब ओर से प्रज्वलित होकर घास और वन को जलाकर राख कर देती है, उसी प्रकार क्रोध से प्रज्वलित युधिष्ठिर अपनी दृष्टि मात्र से ही दुर्योधन की सेना को भस्म कर देंगे।   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.48.15 
कृष्णवर्त्मेव ज्वलित: समिद्धो
यथा दहेत् कक्षमग्निर्निदाघे।
एवं दग्धा धार्तराष्ट्रस्य सेनां
युधिष्ठिर: क्रोधदीप्तोऽन्ववेक्ष्य॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जैसे ग्रीष्म ऋतु में प्रज्वलित अग्नि सब ओर से प्रज्वलित होकर घास और वन को जलाकर राख कर देती है, उसी प्रकार क्रोध से प्रज्वलित युधिष्ठिर अपनी दृष्टि मात्र से ही दुर्योधन की सेना को भस्म कर देंगे।
 
Just as a fire blazing in the summer season blazes up from all sides and burns the grass and forests to ashes, so Yudhishthira, inflamed with anger, will burn down Duryodhana's army with just a glance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)