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mahabharat 5.48.11: दुर्योधन अपने प्राण त्यागकर उस मृत्युशय्या से भी अधिक दुःखदायी और विनाशकारी अंतिम शय्या को स्वीकार करे, जिस पर पुण्यात्मा पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर वन में निर्वासित होकर सोए थे॥11॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.48.11 
यां तां वने दु:खशय्यामवात्सीत्
प्रव्राजित: पाण्डवो धर्मचारी।
आप्नोतु तां दु:खतरामनर्था-
मन्त्यां शय्यां धार्तराष्ट्र: परासु:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन अपने प्राण त्यागकर उस मृत्युशय्या से भी अधिक दुःखदायी और विनाशकारी अंतिम शय्या को स्वीकार करे, जिस पर पुण्यात्मा पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर वन में निर्वासित होकर सोए थे॥11॥
 
May Duryodhana sacrifice his life and accept the last bed of death even more painful and disastrous than the one on which the virtuous Pandunandan Yudhishthir slept after being exiled in the forest. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)