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mahabharat 5.48.109: फिर भी मेरी यही इच्छा है कि वृद्ध पितामह शान्तनु के पुत्र भीष्म, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा और बुद्धिमान विदुर मिलकर जो कुछ कहें, वही हो। सभी कौरव दीर्घायु हों॥109॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  5.48.109 
वृद्धो भीष्म: शान्तनव: कृपश्च
द्रोण: सपुत्रो विदुरश्च धीमान्।
एते सर्वे यद् वदन्ते तदस्तु
आयुष्मन्त: कुरव: सन्तु सर्वे॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
फिर भी मेरी यही इच्छा है कि वृद्ध पितामह शान्तनु के पुत्र भीष्म, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा और बुद्धिमान विदुर मिलकर जो कुछ कहें, वही हो। सभी कौरव दीर्घायु हों॥109॥
 
‘Still I wish that whatever the old grandfather Shantanu's son Bhishma, Kripacharya, Dronacharya, Ashwatthama and the wise Vidura say together, that should happen. May all the Kauravas live long.॥ 109॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि यानसंधिपर्वणि अर्जुनवाक्यनिवेदने अष्टचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत यानसंधिपर्वमें अर्जुनवाक्यनिवेदनविषयक अड़तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)