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mahabharat 5.48.104: ‘रात्रि के समय गीदड़ों के समूह कोलाहल मचाते हैं, राक्षस आकाश से पृथ्वी पर गिरते हैं और मृग, गीदड़, मोर, कौवे, गीध, बगुले और चीते मेरे रथ की ओर दौड़ते हुए आते हैं॥104॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  5.48.104 
गोमायुसंघाश्च नदन्ति रात्रौ
रक्षांस्यथो निष्पतन्त्यन्तरिक्षात्।
मृगा: शृगाला: शितिकण्ठाश्च काका
गृध्रा बकाश्चैव तरक्षवश्च॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
‘रात्रि के समय गीदड़ों के समूह कोलाहल मचाते हैं, राक्षस आकाश से पृथ्वी पर गिरते हैं और मृग, गीदड़, मोर, कौवे, गीध, बगुले और चीते मेरे रथ की ओर दौड़ते हुए आते हैं॥104॥
 
‘At night, groups of jackals create a ruckus, demons fall from the sky to the earth, and deer, jackals, peacocks, crows, vultures, herons and leopards come running to my chariot.॥ 104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)