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mahabharat 5.48.103: म्यान से चमकती हुई तलवार ऐसे निकल रही है मानो साँप ने अपनी पुरानी केंचुली उतारकर चमक रही हो। और मेरी ध्वजा पर यह भयानक वाणी गूँज रही है: "अर्जुन! तुम्हारा रथ युद्ध के लिए कब तैयार होगा?"   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  5.48.103 
खड्ग: कोशान्नि:सरति प्रसन्नो
हित्वेव जीर्णामुरगस्त्वचं स्वाम्।
ध्वजे वाचो रौद्ररूपा भवन्ति
कदा रथो योक्ष्यते ते किरीटिन्॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
म्यान से चमकती हुई तलवार ऐसे निकल रही है मानो साँप ने अपनी पुरानी केंचुली उतारकर चमक रही हो। और मेरी ध्वजा पर यह भयानक वाणी गूँज रही है: "अर्जुन! तुम्हारा रथ युद्ध के लिए कब तैयार होगा?"
 
The gleaming sword is emerging from the sheath as if a snake has shed its old skin and is shining. And this terrifying voice keeps resounding on my flag: Arjuna! When will your chariot be harnessed for the battle?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)