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श्लोक 5.47.15  |
संजय उवाच
प्राप्तोऽस्मि पाण्डवान् गत्वा तं विजानीत कौरवा:।
यथावय: कुरून् सर्वान् प्रतिनन्दन्ति पाण्डवा:॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| संजय ने कहा, "कौरों! तुम्हें यह जान लेना चाहिए कि मैं पाण्डवों से मिलकर लौटा हूँ। पाण्डव अपने-अपने क्रम से समस्त कौरवों का अभिवादन करते हैं।" ॥15॥ |
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| Sanjaya said, "Kauros! You should know that I have returned after visiting the Pandavas. The Pandavas greet all the Kauravas in their respective order of life." ॥15॥ |
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