वैशम्पायन उवाच
एवं सनत्सुजातेन विदुरेण च धीमता।
सार्धं कथयतो राज्ञ: सा व्यतीयाय शर्वरी॥ १॥
अनुवाद
वैशम्पायन ने कहा, 'हे जनमेजय! इस प्रकार राजा धृतराष्ट्र ने पूरी रात महर्षि सनत्सुजात तथा बुद्धिमान विदुर के साथ बातचीत करते हुए बितायी।
Vaishmpayana said, 'O Janamejaya! In this manner King Dhritarashtra spent the entire night in conversation with the great sage Sanatsujata and the wise Vidur.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥