Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.46.30: आत्मा ही मेरा स्थान है और आत्मा ही मेरा जन्म (मूल) है। मैं सबमें व्याप्त हूँ और अपनी अनादि (नवीन) महिमा में स्थित हूँ। मैं अजन्मा हूँ, जड़-चेतन का रूप धारण करता हूँ और रात-दिन जागृत रहता हूँ। मुझे जानकर बुद्धिमान पुरुष अत्यंत सुखी हो जाता है ॥ 30॥ | mahabharat अध्याय 5.46: परमात्माके स्वरूपका वर्णन और योगीजनोंके द्वारा उनके साक्षात्कारका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आत्मा ही मेरा स्थान है और आत्मा ही मेरा जन्म (मूल) है। मैं सबमें व्याप्त हूँ और अपनी अनादि (नवीन) महिमा में स्थित हूँ। मैं अजन्मा हूँ, जड़-चेतन का रूप धारण करता हूँ और रात-दिन जागृत रहता हूँ। मुझे जानकर बुद्धिमान पुरुष अत्यंत सुखी हो जाता है ॥ 30॥
The soul is my place and the soul is my birth (origin). I am permeated in everything and am situated in my ageless (ever-new) glory. I am unborn, have the form of animate and inanimate and am alert day and night. Knowing me, the wise man becomes extremely happy. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥