Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.46.20: इस ईश्वर का स्वरूप सबको दिखाई नहीं देता; केवल वे ही इसे देख सकते हैं जिनका अन्तःकरण शुद्ध है। जो सबके हितैषी हैं, जो अपने मन को वश में रखते हैं, जिनके मन में कभी शोक नहीं होता तथा जो संसार के समस्त सम्बन्धों को सर्वथा त्याग देते हैं, वे मुक्त हो जाते हैं। योगियों को उस सनातन ईश्वर का साक्षात्कार होता है॥ 20॥ | mahabharat अध्याय 5.46: परमात्माके स्वरूपका वर्णन और योगीजनोंके द्वारा उनके साक्षात्कारका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न दर्शने तिष्ठति रूपमस्य
पश्यन्ति चैनं सुविशुद्धसत्त्वा:।
हितो मनीषी मनसा न तप्यते
ये प्रव्रजेयुरमृतास्ते भवन्ति।
योगिनस्तं प्रपश्यन्ति भगवन्तं सनातनम्॥ २०॥
अनुवाद
इस ईश्वर का स्वरूप सबको दिखाई नहीं देता; केवल वे ही इसे देख सकते हैं जिनका अन्तःकरण शुद्ध है। जो सबके हितैषी हैं, जो अपने मन को वश में रखते हैं, जिनके मन में कभी शोक नहीं होता तथा जो संसार के समस्त सम्बन्धों को सर्वथा त्याग देते हैं, वे मुक्त हो जाते हैं। योगियों को उस सनातन ईश्वर का साक्षात्कार होता है॥ 20॥
The form of this God is not visible to everyone; only those whose inner being is pure can see it. Those who are well wishers of all and who have a control over their mind and who never have sorrow in their mind and who completely abandon all the relations of the world, they get liberated. Yogis have a vision of that eternal God.॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥