Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.46.2: हिरण्यगर्भ शुद्ध सच्चिदानन्द परब्रह्म से उत्पन्न होता है और उसी से वह विकास को प्राप्त होता है। वह शुद्ध ज्योतिर्मय ब्रह्म सूर्य के समान समस्त ज्योतियों में स्थित है और सबको प्रकाशित तथा गर्म कर रहा है; वह स्वयं सब प्रकार से श्रेष्ठ और स्वयंप्रकाश है; उस सनातन परमेश्वर का ही योगीजन साक्षात्कार करते हैं॥2॥ | mahabharat अध्याय 5.46: परमात्माके स्वरूपका वर्णन और योगीजनोंके द्वारा उनके साक्षात्कारका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हिरण्यगर्भ शुद्ध सच्चिदानन्द परब्रह्म से उत्पन्न होता है और उसी से वह विकास को प्राप्त होता है। वह शुद्ध ज्योतिर्मय ब्रह्म सूर्य के समान समस्त ज्योतियों में स्थित है और सबको प्रकाशित तथा गर्म कर रहा है; वह स्वयं सब प्रकार से श्रेष्ठ और स्वयंप्रकाश है; उस सनातन परमेश्वर का ही योगीजन साक्षात्कार करते हैं॥2॥
Hiranyagarbha originates from pure Sachchidananda Parabrahma and from that he attains growth. That pure luminous Brahma is present within all the lights like the sun and is illuminating and warming everyone; He himself is supreme in every way and is self-luminous; it is only that eternal God that Yogis encounter. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥