Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.46.19: चाहे कोई मन के समान तीव्रगामी हो और चाहे वह दस लाख पंखों से उड़ता हो, तो भी अन्त में उसे हृदय में स्थित परमात्मा के पास आना ही पड़ेगा। योगीजन उस सनातन परमात्मा का अनुभव करते हैं॥19॥   |   mahabharat अध्याय 5.46: परमात्माके स्वरूपका वर्णन और योगीजनोंके द्वारा उनके साक्षात्कारका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 46: परमात्माके स्वरूपका वर्णन और योगीजनोंके द्वारा उनके साक्षात्कारका प्रतिपादन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.46.19 
य: सहस्रं सहस्राणां पक्षान् संतत्य सम्पतेत्।
मध्यमे मध्य आगच्छेदपि चेत् स्यान्मनोजव:।
योगिनस्तं प्रपश्यन्ति भगवन्तं सनातनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
चाहे कोई मन के समान तीव्रगामी हो और चाहे वह दस लाख पंखों से उड़ता हो, तो भी अन्त में उसे हृदय में स्थित परमात्मा के पास आना ही पड़ेगा। योगीजन उस सनातन परमात्मा का अनुभव करते हैं॥19॥
 
Even if someone is as fast as the mind and even if he flies with ten lakh wings, in the end he will have to come to the God residing in the heart. Yogis experience that eternal God.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)