Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.46.16: चाहे कोई साधन संपन्न हो या अभावग्रस्त, वह ब्रह्म सभी मनुष्यों में समान रूप से देखा जाता है। वह बद्ध और मुक्त दोनों के लिए समान है। अंतर केवल इतना है कि इन दोनों में से केवल मुक्त ही सुख के मूल परमात्मा को प्राप्त करते हैं (अन्य नहीं)। योगीजन उसी सनातन ईश्वर का अनुभव करते हैं॥16॥ | mahabharat अध्याय 5.46: परमात्माके स्वरूपका वर्णन और योगीजनोंके द्वारा उनके साक्षात्कारका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चाहे कोई साधन संपन्न हो या अभावग्रस्त, वह ब्रह्म सभी मनुष्यों में समान रूप से देखा जाता है। वह बद्ध और मुक्त दोनों के लिए समान है। अंतर केवल इतना है कि इन दोनों में से केवल मुक्त ही सुख के मूल परमात्मा को प्राप्त करते हैं (अन्य नहीं)। योगीजन उसी सनातन ईश्वर का अनुभव करते हैं॥16॥
Whether one is endowed with means or destitute, that Brahma is seen equally in all men. He is the same for both the bound and the liberated. The only difference is that out of these two, only those who are liberated attain the Supreme Soul, the source of happiness (not the others). Yogis experience that same eternal God.॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥